हाई कोर्ट का बड़ा आदेश! लगातार काम करने वाले संविदा कर्मी को नियमित किए जाने का आदेश Contract Employees Regularization Latest News

By: Ashu Singh

On: Thursday, July 3, 2025 4:17 PM

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Contract Employees Regularization Latest News: कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट के माध्यम से महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया गया है जो कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के माध्यम से कांटेक्ट कर्मचारी के पक्ष में कहा गया है सभी कर्मचारियों को सरकारी सेवा में नियमित रूप से कार्य किए जाने का अधिकार है और कर्मचारी लंबे समय से अगर काम कर रहे हैं तो इसके साथ-साथ कोर्ट ने यह कहा है कि लगातार सेवा काफी जरूरी है सेवाएं मामले में जहां पर नियोक्ता ने कर्मचारियों को कम से काम रोक रखा हो कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले पर विचार करते हुए यह कहा है कि आग्रह की सरकारी उद्यान में कार्य सुविधा कर्मचारियों के द्वारा याचिका लगाया गया है। उस याचिका को हाई कोर्ट ने स्वीकार करते हुए नियमित किए जाने के लिए चयन समिति को एक बार फिर से विचार किए जाने का आदेश दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के माध्यम से कहा गया है कि सरकारी सेवा में समान अवसर का संवैधानिक उपबंध मौजूद है परंतु अगर कोई कर्मचारी लंबे समय से सेवा में उपलब्ध है तो कई नियमों के तहत इस सेवा को रेगुलर किए जाने का अधिकार भी है। ऐसा करना जरूरी है इसके लिए एक मात्र अपवाद नियंत्रण सेवा में कृत्रिम व विधान भी है जहां पर नियुक्ति के माध्यम से कर्मचारियों को अपना काम करने से रोक दिया गया है।

ऐसे मामलों में कर्मचारियों के नियमित करण का है अधिकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट के माध्यम से जारी किए गए आदेश में यह कहा गया है कि ऐसे मामलों में नियमित कारण से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है। जिसके साथ ही न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा व उनके साथी न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की खंडपीठ के द्वारा आगरा में मौजूद सरकारी उद्यान में मलिक के रूप में कार्य कर रहे समझौता कर्मचारी महावीर सिंह व उनके साथ-साथ पांच अन्य लोगों की विशेष है यह अपील को स्वीकार किया है जिस पर अपना पक्ष सुनते भी कोर्ट के माध्यम से कहा गया है कि चयन समिति को याचिका का पक्ष जरूर सुनना चाहिए एक नए सिरे से नियमितीकरण पर विचार जरूर करना चाहिए।

लगातार कार्य करने वाले कर्मचारी रेगुलर किए जाने के हकदार

इलाहाबाद हाई कोर्ट के माध्यम से जारी किए गए एक आदेश में यह कहा गया है कि जो कर्मचारी निरंतर रूप से कार्य कर रहे हैं। अभी रेगुलर होने के वह भी अधिकार हैं जब तक नियमों में निरंतर कार्य करने की आवश्यकता सम्मिलित नहीं होता। तब तक नियमित ही कारण नियमों को इस एक आधार पर चुनौती मिल सकता है। क्योंकि यह संविधान में अनुच्छेद 16 को लगाना है और याचिका दर्ज करने वाले सभी यात्रियों का यह कहना है कि अलग-अलग तिथियां पर आगरा के सरकारी उद्यानों में मलिक के रूप में 1998 से लेकर 2000 के बीच में संविदा पर यह कर्मचारी लगे थे। तब से आज तक अपनी ड्यूटी या कर रहे हैं सिर्फ कृत्रिम अवकाश को छोड़ते हुए लगातार कार्य किया इसीलिए उन्होंने अपने नियमितीकरण की मांग किया है। उन्होंने 12 सितंबर 2016 के अधिसूचना में रेगुलर होने हेतु आवेदन कर दिया था। परंतु उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के माध्यम से उनकी इस मांग पर एकल पीठ ने राहत दिए जाने से मना कर दिया था।

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